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The Seventh Million

इजराइल के लोग और होलोकॉस्ट

by Tom Segev

9 chapters 19 min listen Hindi audio + text
The Seventh Million
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About this book

दो लफ्जों में

साल 1991 में आई ये किताब उन सभी घटनाओं के बारे में जानकारी देती है जिसमें होलोकॉस्ट ने इजराइल को वो आकार दिया जैसा वो आज है। ये किताब नाजीवाद पर जायोनी लोगों के रिस्पांस से लेकर फिलिस्तीन में यूरोपीय यहूदी रिफ्यूजियों के आने, 6 दिन चली लड़ाई और होलोकॉस्ट मेमोरियल डे तक सब कुछ डीटेल में बताती है। 

 

 

ये किताब किनको पढ़नी चाहिए?

• यहूदी, इजराइली, जर्मन और अमेरिकी लोग

• इतिहास और होलोकॉस्ट की जानकारी चाहने वाले लोग और स्टूडेंट्स 

 

 

लेखक के बारे में

टॉम सेगेव एक बड़े इजराइली अखबार हारेत्ज के लिए लिखते हैं। इस किताब के अलावा उन्होंने One Palestine, Complete: Jews and Arabs Under the British Mandate नाम की किताब भी लिखी है। 

 

ये किताब आपको क्यों पढ़नी चाहिए? 

ताकि आप समझ सकें कि होलोकॉस्ट ने क्या कहर बरपाया था। ऐसा नरसंहार जिसमें नाजी जर्मनी की सोच रखने वाले हिटलर और उसके साथियों ने लगभग छह मिलियन यहूदियों को मार गिराया उसे होलोकॉस्ट के नाम से जाना जाता है जो यूरोप में 1933 और 1945 के दौरान हुआ था। अब सवाल ये उठता है कि इतने बड़े पैमाने की बर्बादी ने "सातवें मिलियन" की पहचान कैसे बनाई? सातवें मिलियन से मतलब है इजराइल की पूरी यहूदी आबादी जिसमें वे लोग भी शामिल हैं जो होलोकॉस्ट के पहले से ही पूर्वी फिलिस्तीन में रहते थे और वे सभी यहूदी भी जो इस घटना के बाद बचे और वहां चले गए। ये किताब इस बात की खोजबीन करती है कि होलोकॉस्ट का इजराइल के ऊपर एक देश के तौर पर, उसकी राजनीति, कल्चर और पहचान पर क्या असर पड़ा। आप देखेंगे कि फिलिस्तीन में पहले से रह रहे यहूदियों की यूरोपियन रिफ्यूजियों और होलोकॉस्ट से बचकर आए लोगों के साथ कैसे तनातनी होती थी और कैसे नए बने इजराइल ने अतीत की डरावनी परछाईं का सामना किया। 

 

इस किताब को पढ़कर आप जानेंगे

• नाजियों और जायोनीवादियों में क्या समानता थी

• कैसे एक यहूदी होलोकॉस्ट सर्वाइवर ने बदला लेने की कोशिश की

• इजराइल के न्यूज चैनल साल में एक दिन "गुड इवनिंग" कहने से परहेज क्यों करते हैं 

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