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Fukushima

Nuclear Disaster की एक और कहानी

by David Lochbaum, Edwin Lyman, Susan Q. Stranahan and the Union of Concerned Scientists

7 chapters 15 min listen Hindi audio + text
Fukushima
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About this book

दो लफ्जों में

न्यूक्लियर पावर के साथ खतरे जुड़े हैं ये बात हर कोई समझता है। न्यूक्लियर प्लांट्स की सुरक्षा के लिए भी बहुत कदम उठाए जाते हैं पर इन सबके बावजूद कोई ना कोई गल्ती हो जाती है। अब ये चाहे human error हो या technical error तबाही पूरे जोर की आती है। साल 2014 में आई ये किताब ऐसी ही एक तबाही की जानकारी आप तक लेकर आती है जहां सरकार की लापरवाही और कंपनियों के थोड़े से लालच ने जानमाल के साथ खिलवाड़ करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। जापान के फुकुशीमा में हुए इस हादसे को चेर्नोबिल के बाद की सबसे बड़ी घटना बताया जाता है। 

 

ये किताब किनको पढ़नी चाहिए?

• जिनको लगता है कि न्यूक्लियर एनर्जी सेफ है

• जो लोग फुकुशीमा हादसे के बारे में जानना चाहते हैं 

 

लेखकों के बारे में

ये किताब साइंस और पॉलिटिकल अवेयरनेस के लिए काम करने वाले Union of Concerned Scientists नाम के एक नॉन प्रॉफिट ऑर्गनाइजेशन से जुड़े लोगों ने लिखी है। डेविड यहां चल रहे Nuclear Safety Project के डायरेक्टर और अमेरिका के टॉप न्यूक्लियर एक्सपर्ट्स में से एक हैं। एडविन इस संस्था के सीनियर साइंटिस्ट हैं। उनको nuclear proliferation, nuclear terrorism और न्यूक्लियर सेफ्टी के टॉपिक्स पर महारत हासिल है। Susan Q. Stranahan एक जानी मानी जर्नलिस्ट हैं जिनको अपने काम के लिए ढेरों अवॉर्ड मिले हैं। उनकी लिखी दूसरी किताबों में Sesquehanna, River of Dreams और Beyond the Flames जैसे नाम शामिल हैं। 

 

इस किताब को पढ़कर आप जानेंगे

• फुकुशीमा के खतरे की घंटी बजाने वाले आदमी की आवाज क्यों दबा दी गई 

• फुकुशीमा हादसे के बाद उस प्लांट का नजारा कैसा था

• न्यूक्लियर पावर के खतरे से कोई भी देश बचा नहीं है 

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