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How to Have Impossible Conversations

A Very Practical Guide

by Peter Boghossian and James A. Lindsay

9 chapters 18 min listen Hindi audio + text
How to Have Impossible Conversations
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About this book

दो लफ्जों में

हाउ टू हैव इम्पॉसिबल कन्वर्सेशन्स (2019) सिखाती है कि tough बातचीत को आसान कैसे करें, बिना रोने-धोने के। पीटर और जेम्स कहते हैं कि चाहे टॉपिक कितना भी पंगा वाला हो, अगर हम अपनी बात रखें और कुछ सीखने की कोशिश करें, तो सबको फायदा होता है – न कि बस चिल्ला-चिल्ली करें। ये lessons आपको respectful बातचीत के तरीके बताएंगे, जैसे दोस्ती कैसे बनाएं और सामने वाले को उनकी सोच पर सवाल उठाने के लिए कैसे मनाएं।

 

ये किसके लिए है?

जो critical thinkers हैं और अच्छी बहस पसंद करते हैं

जो skeptics हैं और बेकार की मान्यताओं को तोड़ना चाहते हैं

जो शांत लोग हैं और चिल्लम-चिल्ली से तंग आ चुके हैं

 

इस समरी से आप सीखेंगे

लोग क्यों सोचते हैं कि वो टॉयलेट का काम समझ सकते हैं, पर समझा नहीं सकते;

किसी को कैसे मनाएं कि soul का वज़न सात पाउंड नहीं;

evolution की बात से पहले किसी का हाल क्यों पूछना चाहिए।

 

लेखक के बारे में

पीटर बोगोसियन पोर्टलैंड स्टेट यूनिवर्सिटी, ओरेगन में philosophy के असिस्टेंट प्रोफेसर हैं। वो सेंटर ऑफ इंक्वायरी में स्पीकर हैं और रिचर्ड डॉकिन्स फाउंडेशन के साथ लेक्चर देते हैं। उनकी किताब अ मैनुअल फॉर क्रिएटिंग एथीइस्ट्स भी है।

जेम्स लिंडसे के पास physics और mathematics की डिग्रीज़ हैं। उन्होंने पांच किताबें लिखी हैं, जैसे सिनिकल थियरीज़, जो पोस्टमॉडर्न सोच पर है। वो टाइम, साइंटिफिक अमेरिकन और फिलॉसफर्स मैगज़ीन में लिखते हैं।

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