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विजनरी कम्पनियों की सफलता के गुर

by Jim Collins and Jerry I. Porras

6 chapters 19 min listen Hindi audio + text
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About this book

दो लफ़्ज़ों में

बिल्ट टू लास्ट (1994) में लगभग दो शताब्दियों पुरानी अठारह जबर्दस्त सफल कम्पनियों की समीक्षा की गई है कि किस तरह से वे इतनी अमीर बनी. इस स्टडी को पढकर आप जान जायेंगे कि ये कम्पनियाँ अपने कम्पीटीटर्स से क्यों और कैसे ज्यादा सफल हुई? इसके टाइटल बिल्ट टू लास्ट से आप हर आर्गेनाइजेशन के प्रत्येक लेवल का का अर्थ समझ सकते हैं. सी ई ओ से लेकर रेगुलर एम्प्लोयीज तक और फार्च्यून 500 कम्पनियों से लेकर शुरूआती छोटे और चैरिटेबल फाउंडेशन तक.

 

ये किताब किन्हें पढ़नी चाहिये?

- जिन्हें ये जानने में रूचि है कि विजनरी कम्पनियाँ किस तरह लम्बे समय तक सफल बनी रहती है.

- वे जिन्हें अपनी कंपनी, संगठन व डिपार्टमेंट को और नये उद्देश्यों से लैस बनाना है.

- जिन्हें सफलता के कुछ नये पॉजिटिव चेंज और अपनी कंपनी की कम्युनिकेशन वेल्यूज को बढ़ाने के लिए वास्तविक टूल्स चाहिये.

 

लेखक के बारे में 

जिम कॉलिंस अमेरिका के एक प्रख्यात लेखक, लेक्चरर और कंसल्टेंट हैं. उन्होंने स्टेनफोर्ड यूनिवर्सिटी ग्रेजुएट स्कूल ऑफ़ बिजनेस में पढ़ाने के अलावा फार्च्यून, बिजनेस वीक व हार्वर्ड बिजनेस रिव्यू में भी अपना योगदान दिया है. ‘गुड टू ग्रेट’ नामक उनकी किताब की तो चालीस लाख प्रतियाँ बिक चुकी है.

जेरी आई पोर्रस एक बिजनेस एनालिस्ट और शिक्षाविद हैं. वे स्टेनफोर्ड यूनिवर्सिटी ग्रेजुएट स्कूल ऑफ़ बिजनेस में आर्गेनाइजेशनल बिहेवियर एंड चेंज के प्रोफेसर हैं. कंपनी के उद्देश्यों और मूल्यों के बारे में मेथड्स तैयार करने में उनकी प्रमुख रूचि है.

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