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The Life of Swami Vivekanand

स्वामी विवेकानंद की आत्मकथा

by Mani Shankar Mukharjee

8 chapters 25 min listen Hindi audio + text
The Life of Swami Vivekanand
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About this book

दो लफ्जों में

‘उठो जागो और तब तक नहीं रुको जब तक लक्ष्य प्राप्त नहीं हो जाता’ ये बेहतरीन बात आज भी उतनी ही अहमियत रखती है जितनी की 19वीं सदी में थी जब स्वामी विवेकानंद नें अपने मुख से इसे कहा था. इश्वर क्या है, कौन है, क्या किसी नें उसे देखा है जैसे गहरे सवाल पूछने वाला 7-8 साल का एक बच्चा किसे पता था कि एक दिन शिकागो में ‘वसुदेव कुटुम्बकम’ की बात कहेगा. एक मिडिल क्लास परिवार में जन्म लेने से विश्व गुरु बनने तक स्वामी विवेकानंद के जीवन से जुड़े हर पहलुयों पर आज हम चर्चा करेंगे. हम इस बायोग्राफी के जरिये  जानने की कोशिश करेंगे कि आखिर उनके व्यक्तित्व में वो क्या बात थी जिससे भारत नही बल्कि भारत को तुच्छ समझने वाले अमेरिका जैसे देशों नें भी बाहें फैला कर उनका स्वागत किया. उनके लाइफ गोल्स, लाइफ अचिवमेंट्स, मेजर माइलस्टोन के बारे में जानकर हम उनके जीवन से अपने जीवन की रूपरेखा तैयार करेंगे.

 

ये किताब किसके लिए है?

- स्वामी विवेकानंद की लाइफ और उनकी टीचिंग में दिलचस्पी रखने वालों के लिए.

- लाइफ में नए आयामों की खोज में जूते लोगों के लिए.

- जो अपनी लाइफ में शांति और स्पिरिचुअलिटी (spirituality) को ढूँढ रहे हो.

- हर उस इंसान के लिए जो लाइफ में सक्सेसफुल होना चाहता है.

 

लेखक के बारे में

इस किताब के लेखक मणि शंकर मुखर्जी रीडर्स के बीच शंकर नाम से फेमस है. वो बंगाली और इंग्लिश साहित्य के जाने माने लेखक है. शंकर नें स्वामी विवेकानंद के जीवन और उनकी शिक्षाओं पर आधारित कई किताबें लिखी हैं. वो बंगाली साहित्य के सबसे सीनियर लेखक है. अपनें बेहतरीन लेखन के लिए उन्हें 18 मार्च 2021 को ‘साहित्य कला अकैडमी’ पुरुस्कार से नवाज़ा गया है.

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