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Train to Pakistan

एक ऐतिहासिक नॉवेल

by Khushwant Singh

6 chapters 27 min listen Hindi audio + text
Train to Pakistan
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About this book

दो लफ्जों में

1947 में जब हिंदुस्तान और पाकिस्तान अलग अलग हुए थे। तब बहुत सारे लोगों को अपना घर छोड़ कर जाना पड़ा था। जो ट्रेन लोगों को लाना - ले जाना करती थी। उस ट्रेन का नाम भूतिया ट्रेन पड़ गया था। साल भर में कम से कम 1 करोड़ लोग अपना घर बदलने पर मजबूर हो गये थे।जिसमें से 10 लाख लोग मारे गए थे। इस कहानी में मनो माजरा में आम इंसान के साथ हुई गई घटनाएं बताई गई हैं । आज मनो माजरा में सुकून बरकरार है और इसका श्रेय जगत सिंह को जाता है । कहने को तो वह डाकू था , लेकिन उसने जो काम किया था किसी हीरो सेकम नहीं था।

 

यह किन लोगो के लिए है

यह कहानी उन लोगों के लिए है जो ऐतिहासिक कहानियां पढ़ना पसंद करते हैं।

 

लेखक के बारे में

खुशवंत सिंह भारत के जाने-माने लेखक हैंवह 'योजना',"हिंदुस्तान टाइम्स"जेसी फेमस न्यूज़पेपरऔर मैगज़ीन के एडिटर रह चुके हैं वे 1980 से 1986 तक पार्लियामेंट के मेंबर भी रह चुके हैं। उन्होंने कई कहानियां लिखी। उन्हें 1974 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया और 2007 में उन्हें पद्म विभूषण से भी सम्मानित किया गया।

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