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The Brand Gap

गुमनामी से ब्रांड बनने तक का सफर

by Marty Neumeier

5 chapters 16 min listen Hindi audio + text
The Brand Gap
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About this book

दो लफ्जों में

ये किताब आपको समझाती है कि कैसे खुद को एक ब्रांड बनाकर कोई कंपनी मार्केट में छा सकती है। इसमें ब्रांडिंग के पांच ऐसे नियम बताए गए हैं जिनकी मदद से आप स्ट्रेटेजी और क्रिएटिविटी का बेहतर तालमेल करके अपने बिजनेस को ऐसा ब्रांड नेम बना देंगे जो सबके दिलो दिमाग पर छा जाए। 

 

ये किताब किनको पढ़नी चाहिए

- जो व्यक्ति अपने काम या बिजनेस को बड़ा नाम और पहचान देना चाहता है ताकि ग्राहक उसे नोटिस करें

- जो व्यक्ति एक सफल मार्केटिंग प्लान डेवलप करना चाहता है

- हर वह व्यक्ति जो किसी कंपनी की स्ट्रैटेजी या क्रिएटिव टीम से जुड़ा है 

 

लेखक के बारे में

मार्टी न्यूमियर एक ब्रांडिंग विशेषज्ञ हैं। उन्होंने एप्पल, नेटस्केप, ईस्टमैन कोडक और दूसरी बहुत सी जानीमानी कंपनियों के साथ काम किया है। 

 

ये किताब मुझे क्यों पढ़नी चाहिए?

सबसे पहले ब्रांड का मतलब समझिए। ब्रांड बस एक लोगो या सुंदर सा डिजाइन नहीं है। ये आपका कोई "कॉर्पोरेट आइडेंटिटी सिस्टम" या प्रोडक्ट भी नहीं है। ब्रांड एक पर्सेप्शन है। एक फीलिंग है, एक विचार है। यानि आप इसे कंट्रोल नहीं कर सकते। हालांकि आप ये जरूर कर सकते हैं कि आपकी कंपनी जो भी प्रोडक्ट बनाती है वो कस्टमर को अच्छी तरह समझ भी आए और पसंद भी। ऐसा करने पर ग्राहक आपकी कंपनी के बारे में अच्छा सोचने लगते हैं और ये अच्छी सोच ही आपका ब्रांड बनाती है। इस समरी में आप उन पांच ब्रांडिंग नियमों के बारे में डीटेल में पढ़ेंगे जिनको अपनाकर आप ग्राहकों में अपनी कंपनी के बारे में वो पॉजिटिव फीलिंग डेवलप करा सकेंगे जैसी आप उम्मीद करते हैं। इस समरी को पढ़कर आप जानेंगे कि जॉन डीरे रीयल इस्टेट के बिजनेस में क्यों नहीं है? आपको अपना मूल स्वभाव क्यों नहीं बदलना चाहिए और कोका-कोला का ब्रांड इतना पावरफुल क्यों है?

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