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Thinking, Fast and Slow

Cool बनने की कोशिश में fool बनता हुआ दिमाग

by Daniel Kahneman

12 chapters 27 min listen Hindi audio + text
Thinking, Fast and Slow
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About this book

दो लफ्जों में

दिमाग हमेशा एक पहेली की तरह रहा है। साल 2011 में आई ये किताब इसे थोड़ा सुलझाने में आपकी मदद करती है। डेनियल को उनकी इस रिसर्च के लिए नोबेल दिया जा चुका है जहां उन्होंने साइकोलॉजी और इकॉनमिक्स के कनेक्शन को समझाने पर काम किया था। ये किताब इसकी एक झलक आप तक लाती है। इन सालों में इस रिसर्च ने दिमाग और हमारे बर्ताव को समझने के लिए दूसरे रिसर्चर्स की भी बहुत मदद की है। इसे पढ़कर आपको ये भी पता चलता है कि कुछ गल्तियां इतनी कॉमन क्यों हैं और हम इनसे किस तरह बच सकते हैं। 

 

ये किताब किनको पढ़नी चाहिए?

• जो लोग इंसानी दिमाग को समझना चाहते हैं

• जो लोग ये जानना चाहते हैं कि इंसान फैसले कैसे लेते हैं

• साइकोलॉजी के स्टूडेंट्स 

 

लेखक के बारे में

Daniel Kahneman को साल 2002 में इकॉनमिक्स के लिए नोबेल दिया गया था। वो Woodrow Wilson School of Public and International Affairs और Center for Rationality at the Hebrew University in Jerusalem के फैलो और Princeton University में साइकोलॉजी के Eugene Higgins Professor के तौर पर जुड़े हुए हैं।

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