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Reader, Come Home

डिजिटल दुनिया में पढ़ाकू दिमाग की स्थिति

by Maryanne Wolf

10 chapters 26 min listen Hindi audio + text
Reader, Come Home
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About this book

दो लफ्जों में

रीडर, कम होम (2018)  डिजिटल क्रांति और घटते अटेन्शन स्पैन के जमाने में रीडिंग के भविष्य पर आधारित किताब है। नई न्यूरोसाइंटिफिक रिसर्च के माध्यम से लेखिका मैरिलीन वुल्फ़ तकनीकी बदलाव के सांस्कृतिक और समझ से जुड़े पहुलुओं का खुलासा करती है जिन्होंने लिखित शब्दों के साथ हमारे रिश्ते को एक नया रूप दिया है। उनकी रिसर्च का केंद्र बिन्दु एक सवाल है जिसका जवाब ही यह निर्धारित करेगा कि हमारे समाज का भविष्य कैसा होगा: हमारे बच्चों के लिए रीडिंग का मतलब क्या होगा जिन्होंने गूगल, स्मार्टफोन्स और ई-बुक्स से बाहर ज्ञान की दुनिया कभी देखी ही नहीं?

 

यह किसके लिए है?

-किताबों के शौकीन लोग जो जानना चाहते हैं कि आधुनिक दुनिया में पढ़ाई पर ध्यान लगाना इतना कठिन क्यों हो गया है

- ई-बुक्स के शौकीन लोग जो पिछले साल की पेपरबैक किताबों के बारे में जानना चाहते हैं

- पेरेंट्स जो अपने बच्चों के डिवाइसों का ओवरयूज़ करने से चिंतित हैं

 

लेखिका के बारे में

मेरीएन वॉल्फ टफ्ट यूनिवर्सिटी में सिटिज़न्शिप और पब्लिक सर्विस की जॉन डिबाजियो प्रोफेसर है। इसके अलावा वह एक वैश्विक साक्षरता प्रोजेक्ट, क्यूरियस लर्निंग की सह-संस्थापक भी हैं। वह 160 से अधिक वैज्ञानिक प्रकाशनों की लेखिका होने के साथ ही साथ उन्होंने रीडिंग पर 'प्राऊस्ट एण्ड द स्किड'और 'टेल्स ऑफ लिटरेसी फॉर ट्वेंटी फर्स्ट सेन्चरी'नाम की दो किताबें भी लिखी हैं। वह यूसीएलए सेंटर फॉर डिस्लेक्सीया, डाइवर्स लर्नर्स और सोशल जस्टिस की डायरेक्टर भी है।

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