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No Self, No Problem

कैसे न्यूरोसाइकोलॉजी बौद्ध धर्म से जुड़ती जा रही है?

by Chris Niebauer

5 chapters 27 min listen Hindi audio + text
No Self, No Problem
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About this book

दो लफ़्ज़ों में 

नो सेल्फ, नो प्रॉब्लम, 2019 में आयी ये किताब बौद्ध धर्म के एक बरसों पुराने सिद्धांत का, न्यूरोसाइंटिफिक सबूतों के साथ विशलेषण करती है. इस सिद्धांत के अनुसार एक अखण्ड और स्थिर ‘मैं’ जैसी कोई चीज़ असल में होती ही नहीं. इस किताब में उन अध्ययनों के बारे में बताया गया है जो इस बात का समर्थन करते हैं कि ‘मैं’ केवल एक भ्रम है. असल में, ‘मैं’ तो बस हमारे मस्तिष्क के भाषा केंद्र द्वारा बनाया गया एक अवास्तविक पैटर्न है.

 

ये किताब किसके लिए है?

- वैज्ञानिक रूप से आध्यात्म की चाह रखने वालों के लिए.

- ध्यान, योग और ताईची को संदेह की नज़रों से देखने वालों के लिए.

- "लेफ्ट-ब्रेंड" कहे जाने वाले लोगों के लिए. यानी वो लोग जो अपने बायें मस्तिष्क का प्रयोग ज्यादा करते हैं.

 

लेखक के बारे में

क्रिस निबाउर (Chris Niebauer) पेन्सिलवेनिया (Pennsylvania ) के स्लिपरी रॉक यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर हैं. वो न्यूरोसाइकोलॉजी के विशेषज्ञ हैं.  वह लेफ्ट और राईट ब्रेन के बीच के फर्क, माइंडफुलनेस और कॉनशिअसनेस जैसे विषयों पर पढ़ाते हैं. इससे पहले उन्होंने ‘द न्यूरोटिक्स गाइड टू अवॉइडिंग एनलाइटनमेंट’ और ‘कैचिंग अप विथ द बुद्धा’ नाम की किताबें भी लिखी हैं.

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