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Everest on One Leg

The Girl Who Would Not Stay Down

by Arunima Sinha

7 chapters 11 min listen Hindi audio + text
Everest on One Leg
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About this book

दो लफ़्ज़ों में

एक पैर से एवरेस्ट नेशनल लेवल की वॉलीबॉल खिलाड़ी अरुणिमा सिन्हा की सच्ची कहानी है। लुटेरों ने उन्हें चलती ट्रेन से धक्का दे दिया, और एक हादसे में उनका पैर चला गया। लेकिन सिर्फ़ दो साल बाद, नकली पैर के सहारे, वो माउंट एवरेस्ट पर चढ़ने वाली दुनिया की पहली ऐसी महिला बनीं, जिनका एक पैर कटा हुआ था।

यह कहानी किन लोगों के लिए है?

  • जो सोने से पहले कोई रोमांचक और दिल छू लेने वाली सच्ची कहानी सुनना चाहते हैं।
  • जो किसी हादसे, बीमारी या मुश्किल के बाद फिर से उठने की हिम्मत ढूँढ रहे हैं।
  • खिलाड़ी, स्टूडेंट्स और वो सब, जिन्हें कभी कहा गया कि "तुमसे नहीं होगा"।

इस कहानी में आप जानेंगे

कैसे एक रात की ट्रेन यात्रा ने एक खिलाड़ी की ज़िंदगी बदल दी।

क्यों अस्पताल के बिस्तर पर लिया गया एक फ़ैसला, सबको पागलपन लगा।

और कैसे बछेंद्री पाल के एक वाक्य ने अरुणिमा को दुनिया की छत तक पहुँचा दिया।

कहानी की नायिका के बारे में

अरुणिमा सिन्हा का जन्म 1988 में उत्तर प्रदेश के अंबेडकर नगर में हुआ। वो नेशनल लेवल की वॉलीबॉल खिलाड़ी थीं।

2011 के ट्रेन हादसे के बाद, उन्होंने 21 मई 2013 को माउंट एवरेस्ट फ़तह किया। 2015 में उन्हें पद्म श्री से सम्मानित किया गया। उन्होंने अपनी कहानी "बॉर्न अगेन ऑन द माउंटेन" किताब में भी लिखी है।

This is a summary of Everest on One Leg by Arunima Sinha. If the ideas speak to you, read the full book.

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